प्रभुजी शरण तिहारो आयो ।। टेक ।।
जो कोई शरण तिहारी नहीं,
भरम भरम दुःख पायो ।। प्रभुजी
ओरन के मन देवी देवा,
मेरे मन तू भाया ।
जब सों सूरत संभारि जग में,
और अन शीश झुकायो । । प्रभुजी
नरपति सुरपतिआस तिहरी,
इस सुनि हरि मैं धायो।
तीर्थ व्रत सकल फल सब त्यागे,
चरण कमल चिट लायो ।। प्रभुजी
नारद मुनि अरु शिव ब्रह्मादिक,
तेरा ही ध्यान लगायो ।
आदि अनादि युगादि तेरा ही यश,
वेद पुरानन गायो ।। प्रभुजी
अब तुम बाँह गहो हरी मेरा,
तेरौ दास कहायो ।।
चरणदास कहै करता तू ही,
गुरु सुकदेव बताओ ।। प्रभुजी